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स्कूल: शिक्षा की गुणवत्ता के सुधार पर काम करेगा एनसीईआरटी, सत्र 2027 से विवि के तौर पर काम शुरू करने की तैयारी

स्कूल: शिक्षा की गुणवत्ता के सुधार पर काम करेगा एनसीईआरटी, सत्र 2027 से विवि के तौर पर काम शुरू करने की तैयारी एनसीईआरटी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, रिसर्च और शिक्षक प्रशिक्षण को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने ज…

19 सितंबर 2026 को 07:02 am बजे
स्कूल: शिक्षा की गुणवत्ता के सुधार पर काम करेगा एनसीईआरटी, सत्र 2027 से विवि के तौर पर काम शुरू करने की तैयारी

सौजन्य से:- amarujala.com

स्कूल: शिक्षा की गुणवत्ता के सुधार पर काम करेगा एनसीईआरटी, सत्र 2027 से विवि के तौर पर काम शुरू करने की तैयारी

एनसीईआरटी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, रिसर्च और शिक्षक प्रशिक्षण को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। संस्थान सत्र 2027 से विश्वविद्यालय के रूप में काम शुरू करने की तैयारी कर रहा है।

विस्तार

स्कूली शिक्षा के पाठयक्रम की किताबें तैयार करने के साथ अब राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार पर भी काम करेगी। शैक्षणिक सत्र 2027-28 से एनसीईआरटी स्नातक और स्नातकोत्तर के अलावा पीएचडी पाठयक्रमों में पहला बैच शुरू करने की तैयारी कर रहा है।

इसमें बीए-बीएड, बीएससी-बीएड, बीकॉम-बीएड डिग्री शामिल होगी। स्कूली शिक्षा के आधार पर इन डिग्री प्रोग्राम के पाठयक्रम की समीक्षा होगी। स्कूली शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार, पढ़ाने के तरीकों में बदलाव, खेल-खेल में पढ़ाई, स्कूली पढ़ाई में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस(एआई) का प्रयोग, प्रौद्योगिकी से पढ़ने को आसान करने के तरीकों को शामिल किया जाएगा।

वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, एनसीईआरटी को डीम्ड -टू बी यूनिवर्सिटी का दर्जा मिल चुका है। इसी के तहत अगले शैक्षणिक सत्र 2027-28 से स्नातक और स्नातकोत्तर पाठयक्रमों में दाखिले की तैयारी है। एनसीईआरटी अभी तक बालवाटिका से 12वीं कक्षा तक स्कूली शिक्षा का पाठयक्रम तैयार करता है। लेकिन शिक्षक बनने की पढ़ाई पर उतना काम नहीं हो पाता था।

क्योंकि, स्कूली पाठयक्रम के आधार पर शिक्षक बनने की पढ़ाई का पाठयक्रम एक समान नहीं है। इसलिए यूजी और पीजी डिग्री प्रोग्राम शुरू करने से पहले, एनसीटीई के साथ मिलकर उसके पाठयक्रम की भी समीक्षा करेगी। इससे पहले, स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार में शिक्षक में कहां कमी है, उसकी रिपोर्ट तैयार होगी। इसमें कमियों को चिहिंत करते हुए उसमें बदलाव संभव होगा।

इसके कारण बदलाव जरूरी:

एनसीईआरटी ने छात्रों की योग्यता-आधारित दक्षताओं का आकलन किया था। कक्षा 3, 6, और 9 के छात्रों का भाषा, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान में मूल्यांकन किया गया। इसमें सामने आया कि कक्षा 3 के 45 फीसदी छात्र 99 तक की संख्याएं ठीक से नहीं लिख पाए, और कक्षा 6 के 47 फीसदी बच्चे 10 का पहाड़ा नहीं सुना सके तो 54 फीसदी छात्र गणित की बुनियादी अवधारणाओं (जैसे स्थान मान, जोड़-घटाव) को समझने में संघर्ष कर रहे हैं। इसका प्रमुख कारण, सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, बुनियादी ढांचे का अभाव, और पुरानी शिक्षण विधियां हैं।

यह रीजनल सेंटर बनेंगे कॉलेज: एनसीईआरटी के साथ छह रीजनल सेंटर कॉलेजों में तब्दील होंगे जिसमें अजमेर (राजस्थान), भोपाल (मध्य प्रदेश), भुवनेश्वर (ओडिशा), मैसूर (कर्नाटक), शिलांग (मेघालय) और भोपाल का पंडित सुंदरलाल शर्मा व्यावसायिक शिक्षा संस्थान शामिल हैं।

फिलहाल इन सेंटरों में स्थानीय यानी प्रदेश सरकार के विश्वविद्यालयों से प्राप्त डिग्री और पीएचडी प्रोग्राम की पढ़ाई करवाई जाती है। लेकिन वर्ष 2027 से एनसीईआरटी की अपनी डिग्री की पढ़ाई शुरू होगी। उससे पहले, जो बैच पंजीकृत हैं, उनमें संबंधित विश्वविद्यालयों से डिग्री अवार्ड होगी।

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