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जमशेदपुर में शिक्षा व्यवस्था का रिपोर्ट कार्ड: 60 स्कूलों के पास जमीन नहीं, 21 में कंप्यूटर गायब - jamshedpur schools 60 lack land 21 no computers

जमशेदपुर में शिक्षा व्यवस्था का रिपोर्ट कार्ड: 60% स्कूलों के पास जमीन नहीं, 21% में कंप्यूटर गायब जमशेदपुर के प्राथमिक विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है, जहाँ 60% स्कूलों के पास अपनी जमीन नहीं है और 21% मे…

4 अक्टूबर 2026 को 05:02 pm बजे
जमशेदपुर में शिक्षा व्यवस्था का रिपोर्ट कार्ड: 60 स्कूलों के पास जमीन नहीं, 21 में कंप्यूटर गायब
 - jamshedpur schools 60 lack land 21 no computers

सौजन्य से:- Jagran

जमशेदपुर में शिक्षा व्यवस्था का रिपोर्ट कार्ड: 60% स्कूलों के पास जमीन नहीं, 21% में कंप्यूटर गायब

जमशेदपुर के प्राथमिक विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है, जहाँ 60% स्कूलों के पास अपनी जमीन नहीं है और 21% में कंप्यूटर नहीं हैं।

HighLights

- 21% स्कूलों में कंप्यूटर और 41% में पुस्तकालय की सुविधा नहीं।

- विधायक सरयू राय ने शिक्षकों की कमी और बुनियादी ढांचे पर सवाल उठाए।

जासं, जमशेदपुर। जमशेदपुर के 21 प्रतिशत प्राथमिक विद्यालयों में कंप्यूटर नहीं है, 41 प्रतिशत में पुस्तकालय नहीं है, 60 प्रतिशत विद्यालयों के पास अपनी जमीन नहीं है, 33 प्रतिशत की बाउंड्रीवॉल नहीं है और 75 प्रतिशत विद्यालयों में स्मार्ट बोर्ड की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

ये चौंकाने वाले आंकड़े जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने रविवार को उजागर किए। डीबीएमएस हाई स्कूल के कलाकृति प्रेक्षागृह में आयोजित ‘शिक्षकों का सम्मान, शिक्षा का उत्थान’ कार्यक्रम में सरयू राय ने शिक्षा विभाग की जमीनी हकीकत पर खुलकर बात की।

उन्होंने कहा कि प्राथमिक विद्यालयों के लिए सरस्वती वाहिनी का अनुदान समय पर नहीं आता। कई विद्यालयों में बुनियादी शौचालय और पर्याप्त बेंच-डेस्क तक नहीं हैं।

शिक्षकों की भारी कमी है, और जो पदस्थापित हैं, उन्हें पढ़ाने के बजाय प्रतिनियुक्ति पर प्रशासनिक कार्यालयों या अधिकारियों के दफ्तरों में गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगा दिया जाता है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब हमारी प्राथमिक शिक्षा की नींव ही कमजोर होगी, तो नई शिक्षा नीति (NEP) का लाभ कैसे मिलेगा? पहले नींव को मजबूत बनाना होगा।

शिक्षाविदों और कुलपतियों ने रेखांकित कीं चुनौतियां

कार्यक्रम में पहुंचे प्रमुख शिक्षाविदों, कुलपतियों और निदेशकों ने शिक्षा व्यवस्था के सुधार, तकनीकी बदलावों और गुरु-शिष्य संबंध पर अपने विचार रखे:

- प्रोफेसर अंजिला गुप्ता (कुलपति, कोल्हान विश्वविद्यालय): उन्होंने कहा कि किसी भी देश का विकास शिक्षा के बिना संभव नहीं है। आज ज्ञान के साथ कौशल, नवाचार और सामाजिक बदलाव को अपनाना होगा।

ऑनलाइन शिक्षा कभी भी गुरु-शिष्य के प्रत्यक्ष संवाद का विकल्प नहीं हो सकती। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे बदलते दौर के साथ खुद को अपडेट करें और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) व मशीन लर्निंग को समझकर शिक्षण में अपनाएं।

- प्रोफेसर दिनेश कुमार सिंह (कुलपति, नीलांबर-पितांबर विश्वविद्यालय): उन्होंने स्वीकार किया कि हाल के वर्षों में गुरु और शिष्य के बीच संवाद (Interaction) में काफी कमी आई है।

इसका सीधा असर शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ा है। स्कूली व्यवस्था में सुधार करना बेहद जरूरी है, क्योंकि समाज की वास्तविक प्रगति बेहतर शिक्षा से ही संभव है।

- प्रोफेसर चंद्रभूषण शर्मा (कुलपति, विनोबा भावे विश्वविद्यालय): कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. शर्मा ने कहा कि आज की शिक्षा व्यवस्था का बड़ा बोझ महिला शिक्षिकाएं उठा रही हैं।

हालांकि, शिक्षकों को योग्यता के अनुरूप मानदेय नहीं मिलता। उन्हें नियमों के तहत विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों के समान वेतनमान मिलना चाहिए।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार के पास चुनावी योजनाओं के लिए हर महीने बजट होता है, लेकिन शिक्षकों के सही मानदेय के लिए पैसे नहीं होते।

- प्रोफेसर गौतम सूत्रधर (निदेशक, एनआईटी जमशेदपुर): उन्होंने कहा कि बदलते दौर में शिक्षा को सीधे रोजगार से जोड़ना होगा। इसके लिए 'एडवांस लैबोरेट्री प्रोग्राम' चलाने की जरूरत है ताकि अध्ययन व्यावहारिक बन सके।

- प्रभाकर सिंह (कुलाधिपति, सोनादेवी विश्वविद्यालय): उन्होंने कहा कि भारत विश्वगुरु रहा है और रहेगा। हालांकि, यदि समाज में मेधावियों और शिक्षकों का उचित सम्मान नहीं होगा, तो युवा प्रतिभाएं भटक जाएंगी।

- अंशुल शरण (अध्यक्ष, युगांतर भारती): उन्होंने घोषणा की कि झारखंड में शिक्षा व्यवस्था की कमियों को उजागर करने और सुधार के प्रयास का यह अभियान केवल जमशेदपुर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राज्य के सभी 24 जिलों में शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित किए जाएंगे।

तीन तकनीकी सत्रों में हुआ गहन मंथन

समारोह के दौरान तीन महत्वपूर्ण तकनीकी सत्रों (Technical Sessions) का आयोजन किया गया, जिसमें शिक्षा के विभिन्न पहलुओं पर शोध पत्र पढ़े गए और परिचर्चा हुई:

- प्रथम सत्र (प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा): इसमें प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों की समस्याओं पर फोकस रहा। डॉ. अशोक कुमार सिंह, शशि भूषण दुबे, अंजनी कुमार, मनोज कुमार, डॉ. अमर कुमार सिंह (की ओर से कृष्ण कुमार सिंह), डॉ. उदित नारायण, डॉ. प्रियंका झा और मेरी ऐन प्रिया ने शोध पत्र प्रस्तुत किए। सत्र के अंत में सवाल-जवाब का खुला सत्र हुआ।

- द्वितीय सत्र (उच्च एवं तकनीकी शिक्षा व छात्र-युवा असंतोष): इसकी अध्यक्षता प्रोफेसर रागिनी भूषण ने की। इस सत्र में डॉ. ज्योति प्रकाश, पामेला घोष दत्ता, डॉ. मनोज कुमार और हेमंत पाठक ने हिस्सा लिया। सत्र का सफल संचालन डॉ. पुष्पा कुमारी द्वारा किया गया।

- तृतीय एवं समापन सत्र: इस अंतिम सत्र की अध्यक्षता विधायक सरयू राय ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष शंभूनाथ चौधरी उपस्थित थे। सत्र का संचालन चंद्रदीप पांडेय ने किया।

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