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कोचिंग कल्चर के खिलाफ, PhD के बाद गांव को दिए 3 साल, IIT बॉम्बे डायरेक्टर प्रो शिरीष केदारे से जुड़ी 7 बातें

रविवार देर रात निदेशक ने छात्रों को अपने पद से इस्तीफा देने की बात कही है। लेकिन अभी उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया है। संस्थान ने इसकी आधिकारिक पुष्टी की है। इस बीच, डायरेक्टर प्रो. शिरीष केदारे के बारे में जानना जरूरी हो ज…

21 सितंबर 2026 को 12:02 pm बजे
कोचिंग कल्चर के खिलाफ, PhD के बाद गांव को दिए 3 साल, IIT बॉम्बे डायरेक्टर प्रो शिरीष केदारे से जुड़ी 7 बातें

सौजन्य से:- Navbharat Times

रविवार देर रात निदेशक ने छात्रों को अपने पद से इस्तीफा देने की बात कही है। लेकिन अभी उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया है। संस्थान ने इसकी आधिकारिक पुष्टी की है। इस बीच, डायरेक्टर प्रो. शिरीष केदारे के बारे में जानना जरूरी हो जाता है।

कौन हैं प्रो. शिरीष केदारे ?

प्रोफेसर शिरीष केदारे वर्तमान में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT), बॉम्बे के डायरेक्टर हैं। उन्हें 6 मई 2024 को प्रोफेसर सुभासिस चौधरी की जगह आईआईटी बॉम्बे का निदेशक बनाया गया था।

निदेशक बनने से पहले, उन्होंने कई शैक्षणिक और प्रशासनिक पदों पर सेवाएं दी हैं। इनमें ONGC के पूर्व स्वतंत्र निदेशक, आईआईटी मद्रास के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य और शिक्षा मंत्रालय के अधीन आईआईटी परिषद के मनोनीत सदस्य का पद भी शामिल है।

आईआईटी बॉम्बे के अनुसार, प्रो. शिरीष केदारे के 57 इंटरनेशनल और 10 नेशल जर्नल्स में पेपर्स पब्लिश हो चुके हैं। इसके अलावा, कॉन्फ्रेंस और प्रोसीडिंग्स में 44 इंटरनेशनल और 7 नेशनल पेपर्स छप चुके हैं।

आईआईटी डायरेक्टर प्रो. शिरीष केदारे से जुड़ी 7 बातें

1. IIT बॉम्बे से 41 साल पुराना नाता: प्रोफेसर शिरीष केदारे का आईआईटी बॉम्बे से लगभग 41 साल पुराना नाता है। उन्होंने साल 1985 में यहीं से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया था। इसके बाद, साल 1992 में पीएचडी पूरी की और साल 2024 में इसी संस्थान में डायरेक्टर बने।

2. हवा से चलने वाली मशीन पर रिसर्च: आमतौर पर इंजीनियरिंग में पारंपरिक विषयों पर रिसर्च होती है। लेकिन प्रो. शिरीष केदारे का पीएचडी सब्जेक्ट सबसे हटकर हवा से चलनी वाली मशीन यानी 'रेसिप्रोकेटिंग विंड मशीन' (Reciprocation wind Machine) पर था।

3. गांव के विकास के लिए बिताए 3 साल: आईआईटी बॉम्बे से पीएचडी की पढ़ाई पूरी करने के बाद, जब ज्यादा स्टूडेंट्स बड़ी कंपनियों के हाई सैलरी पैकेज या विदेशी यूनिवर्सिटी का रुख कर रहे थे, तब प्रो. केदारे ने गांव का रास्ता चुना। उन्होंने 1992 से 1995 तक गांवों के विकास और सामाजिक कार्यों में बतौर वॉलेंटियर के रूप में काम किया।

4. खादी और गांव को मॉर्डन बनाने में योगदान: प्रो. केदारे सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने 1998 से 2001 के बीच खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) के चेयरमैन में तकनीकी सलहाकार के रूप में काम किया। उन्होंने गांवों के उद्योगों के कलस्टर्स को डेवलेप करने और वहां नई टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने में अहम योगदान दिया।

5. 65 से ज्यादा रिसर्च पेपर्स और 6 पेटेंट: शिरीष केदारे आईआईटी बॉम्बे के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर रह चुके हैं। जहां उन्होंने सौर ऊर्जा और थर्मल एनर्जी स्टोरेज के फील्ड में काम किया। उनके नाम पर 6 पेटेंट और 65 से ज्यादा रिसर्च पेपर लिखे हैं।

6. ONGC, NTPC और IIT मद्रास का हिस्सा: प्रोफेसर शिरीष केदारे कॉर्पोरेट और सरकारी बोर्ड्स का हिस्सा रह चुके हैं। महारत्न कंपनी ONGC के इंडिपेंडेंट डायरेक्टर, NTPC की रिसर्च एडवाइजरी काउंसलिंग (RAC) और IIT मद्रास के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का भी हिस्सा रहे हैं।

7. कोचिंग कल्चर के खिलाफ बेबाक: उनका मानना है कि देश में कोचिंग कल्चर स्टूडेंट्स का कॉन्सेप्ट समझने की क्षमता को खत्म करता है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कोचिंग कल्चर पर चिंता जाहिर करते हुए कहा था, 'कोचिंग क्लासेस छात्रों को केवल एग्जाम क्रैक करना सिखाती है, जिससे उनकी कॉन्सेप्चुअल समझ खत्म हो जाती है।' उन्होंने कहा था कि यह अप्रोच आईआईटी जैसे बड़े संस्थानों में आने के बाद काम नहीं आती।

बता दें कि सोलर फ्रेनेल कंसंट्रेटिंग रिफ्लेक्टर्स, खासकर 'अरुण' सीरीज के रिसर्च, डेवलपमेंट, डिजाइन, फैब्रिकेशन, इंस्टॉलेशन और परफॉर्मेंस टेस्टिंग में उनका योगदान बहुत अहम रहा है। इनमें Arun160, Arun100 और Arun30 जैसे वर्शन शामिल हैं, जिनका भारत में अलग-अलग जगहों पर सफलतापूर्वक टेस्ट और इस्तेमाल किया गया है।

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