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Success Story: IIT-NIT नहीं, यहां से पढ़कर 1.3 करोड़ सैलरी तक पहुंचा UP का लड़का, 6 महीने में आए 8 ऑफर

10वीं में 85.4%- 12वीं में 88.8% नंबर वैभव मिश्रा, उत्तर प्रदेश के कानपुर के साधारण परिवार से आते हैं। बचपन से पढ़ाई में होशियार रहे हैं। उन्होंने साल 2015 में 85.4% नंबर के साथ 10वीं (ICSE) और साल 2017 में 88.8% 12वीं (…

14 सितंबर 2026 को 04:02 am बजे
Success Story: IIT-NIT नहीं, यहां से पढ़कर 1.3 करोड़ सैलरी तक पहुंचा UP का लड़का, 6 महीने में आए 8 ऑफर

सौजन्य से:- Navbharat Times

10वीं में 85.4%- 12वीं में 88.8% नंबर

वैभव मिश्रा, उत्तर प्रदेश के कानपुर के साधारण परिवार से आते हैं। बचपन से पढ़ाई में होशियार रहे हैं। उन्होंने साल 2015 में 85.4% नंबर के साथ 10वीं (ICSE) और साल 2017 में 88.8% 12वीं (ISC) बोर्ड परीक्षा पास की थी। परिवार ने हमेशा उनकी शिक्षा और सपनों को सपोर्ट किया है।

(फोटो सोर्स: Insta/vaibhav_in_dubai)

IIT-NIT नहीं, यहां से की है पढ़ाई

अक्सर IIT-NIT की डिग्री को इंजीनियरिंग फील्ड में बेहतर भविष्य की गारंटी माना जाता है। लेकिन वैभव ने छोटे शहर के कॉलेज से पढ़कर करोड़ों का पैकेज हासिल किया है। वैभव मिश्रा की लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट (ABV-IITM), ग्वालियर से कंप्यूटर साइंस में बीटेक की डिग्री हासिल की है।

(फोटो सोर्स- Insta/vaibhav_in_dubai)

छोटी कंपनियों से भी मिल रहा था रिजेक्शन

कॉलेज के दिनों से उन्होंने फ्रेंट-एंड डेवलपमेंट और कॉम्पिटेटिव प्रोग्रामिंग में अपनी पकड़ मजबूत कर ली थी। लेकिन सफलता का रास्ता अभी भी आसान नहीं था। एक समय ऐसा भी था जब वे छोटी-छोटी कंपनियों और स्टार्टअप्स के इंटरव्यू में भी रिजेक्ट हो जाते थे। लगातार मिल रही असफलताओं और रिजेक्शन के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी।

(फोटो सोर्स- Insta/vaibhav_in_dubai)

ये 5 चीजें बनीं लाइफ का टर्निंग पॉइंट

कई रिजेक्शन के बाद, वैभव ने अपनी कमियों को पहचाकर तकनीक, सिस्टम डिजाइन और इंटरव्यू की तैयारी पर ज्यादा फोकस किया। यहां बताई गई पांच चीजें उनकी लाइफ की सबसे बड़ी टर्निंग पॉइंट साबित हुईं, जो इस प्रकार हैं-

- टेक्निकल नॉलेज और कॉम्पिटेटिव प्रोग्रामिंग: ABV-IIITM ग्वालियर से बीटेक की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रॉब्लम सॉल्विंग और कॉम्पिटेटिव प्रोग्रामिंग का काफी काम किया। यही नींव टफ टेक्निकल और कोडिंग राउंड्स को आसानी से क्रैक करने में मददगार बनी।

- रिजेक्शन से सीख: शुरुआत असफलताओं से निराश होने के बजाय अपनी कमियों को पहचानना। सिस्टम डिजाइन और इंटरव्यू स्ट्रैटेजी पर काम किया।

- स्किल्स और स्पेशलाइजेशन: उन्होंने जेनेरिक बनने के बजाय फ्रंट-एंड इंजीनियरिंग में विशेषज्ञता हासिल की। उन्होंने प्रोग्रामिंग (C++, C, Java, JavaScript), वेब डेवलपमेंट (Node.js, Express.js, React, Redux, HTML, CSS), डेटाबेस (MySQL और NoSQL) और अन्य स्किल्स पर फोकस किया।

- कई इंटरव्यू: रिजेक्शन के बाद जब आपकी तैयारी का स्तर बढ़ जाता है, तो लगातार इंटरव्यू देना मोमेंटम बनाता है। 6 महीनों में न सिर्फ 8 अलग-अलग कंपनियों के इंटरव्यू दिए, बल्कि उन्हें क्रैक भी किया।

- रियल वर्ल्ड का एक्सपीरियंस: Groww, India में करीब तीन साल तक काम करने के दौरान उन्होंने बड़े पैमाने पर वेब परफॉर्में, नेक्स्ट जेएस और यूजर एक्सपीरियंस ऑप्टिमाइजेशन पर किया। असल दुनिया की इसी प्रैक्टिकल नॉलेज ने उन्हें साधारण डेवलपर से सीनियर इंजीनियर बना दिया।

(फोटो सोर्स - linkedin/vaibhavmishra09)

6 महीनों में आए 8 कंपनियों के ऑफर

वैभव की लगातार मेहनत और कठिन परिश्रम का ही नतीजा था कि उन्हें सिर्फ 6 महीने में देश-विदेश की 8 कंपनियों के अच्छे-खासे ऑफर मिले हैं-

- Coinswitch: 40-45 लाख CTC

- ShopFlo: 40-45 लाख CTC

- Atlassian: 55-60 लाख CTC SDE 1

- Blinkit: 31 लाख बेस

- Upstocks: 45-50 लाख CTC

- Zeta: 55-60 लाख CTC

- InTuit: 70-80 लाख CTC

- ByteDance: 1.3 करोड़ CTC

वर्तमान में वैभव ने ByteDance कंपनी का 1.3 करोड़ रुपये का पैकेज एक्सेप्ट किया है और दुबई में सीनियर फ्रंट-एंड इंजीनियरिंग के रूप में काम कर रहे हैं। उनकी कहानी साबित करती है कि असफलताओं से सीखने का जज्बा और लगातार कोशिश करने की लगन है, जो शुरुआती रिजेक्शन आपकी काबिलियत का पैमाना नहीं बन सकते। आप सही दिशा में मेहनत करके किसी भी बड़ी मंजिल को हासिल कर सकते हैं।

(फोटो सोर्स - linkedin/vaibhavmishra09)

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