JPSC-JSSC परीक्षा मामलाः OMR से लेकर डिजिटल सिस्टम तक में सेंधमारी
JPSC-JSSC परीक्षा मामलाः OMR से लेकर डिजिटल सिस्टम तक में सेंधमारी जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा मामले की जांच कर रही सीआईडी ने बड़ा खुलासा किया है. प्रशांत कुमार की रिपोर्ट. Published : September 8, 2026 at 5:13 PM IST रांच…

सौजन्य से:- etvbharat.com
JPSC-JSSC परीक्षा मामलाः OMR से लेकर डिजिटल सिस्टम तक में सेंधमारी
जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा मामले की जांच कर रही सीआईडी ने बड़ा खुलासा किया है. प्रशांत कुमार की रिपोर्ट.
Published : September 8, 2026 at 5:13 PM IST
रांचीः झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित धांधली और भ्रष्टाचार की जांच कर रही झारखन्ड सीआईडी की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं.
बड़े खुलासे
कोर्ट के समक्ष पेश दस्तावेजों और जांच से जुड़े तथ्यों के अनुसार, इस पूरे मामले में परीक्षा कराने वाली एजेंसी TDPL और उसके मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी ही पैसे के बदले नौकरी देने का मास्टरमाइंड है. जांच में अभय तिवारी पर अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराने और अंतिम चयन कराने का भरोसा देकर पैसे लेने, परीक्षा प्रक्रिया में कथित तौर पर हेरफेर कराने और अपने संपर्कों का इस्तेमाल कर नौकरी दिलवाने की बात सामने आई हैे. दस्तावेज में यह भी दावा किया गया है कि FRO और ACF परीक्षा की 500 से अधिक OMR शीट में कथित हेरफेर किया गया. साथ ही मूल्यांकन प्रणाली और सर्वर में डिजिटल स्तर पर छेड़छाड़ किए जाने की बात भी सामने आई है.
अभय तिवारी पर अभ्यर्थियों को सिस्टम मैनिपुलेट करने का भरोसा दिलाने का आरोप
सीआईडी की जांच में अभय तिवारी की भूमिका को लेकर सबसे गंभीर आरोप यह है कि वह अभ्यर्थियों को परीक्षा में सफलता दिलाने का भरोसा देता था. जांच से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, वह अपने और अपने करीबियों के कथित चयन को उदाहरण के तौर पर बताकर अभ्यर्थियों को विश्वास दिलाता था कि परीक्षा की व्यवस्था को प्रभावित किया जा सकता है.
आरोप है कि अभय तिवारी पीटी परीक्षा पास कराने के नाम पर करीब 5 लाख रुपये और अंतिम चयन कराने के लिए 10 लाख से 25 लाख रुपये तक की रकम की मांग करता था. यानी कथित तौर पर अभ्यर्थियों को पहले प्रारंभिक परीक्षा पास कराने का भरोसा दिया जाता था और इसके बाद अंतिम चयन के लिए अलग-अलग रकम की मांग की जाती थी.
पत्नी, भाई और रिश्तेदारों के चयन की भी जांच
जांच में अभय तिवारी के परिवार और रिश्तेदारों से जुड़े परीक्षा परिणाम भी जांच के दायरे में आने की बात कही गई है. दस्तावेज में दावा किया गया है कि अभय तिवारी ने अपनी पत्नी, भाई और अन्य रिश्तेदारों को परीक्षा में पास कराकर नौकरी दिलाने में कथित भूमिका निभाई. अब सीआईडी यह पता लगाने में जुटी है कि इन लोगों ने किन-किन परीक्षाओं में हिस्सा लिया, उनके परीक्षा परिणाम क्या रहे और उनकी सफलता में किसी तरह की अनियमितता हुई या नहीं.
सीआईडी इस बिंदु पर भी जांच कर रही है कि अभय तिवारी से सीधे या परोक्ष रूप से जुड़े और कितने लोगों ने JPSC की परीक्षाएं दीं और उनमें से कितने अभ्यर्थियों का चयन हुआ. दस्तावेज में कई रोल नंबर भी दर्ज हैं. स्पष्ट भाषा में समझें तो जिस परीक्षा एजेंसी और उसके कर्मचारी की भूमिका पर परीक्षा में कथित गड़बड़ी के आरोप लगे हैं, उसी एजेंसी द्वारा आयोजित परीक्षा में उसके परिवार के सदस्य के शामिल होने को लेकर भी अब सबूत सीआईडी को मिलने लगे हैं.
500 से ज्यादा OMR में हेरफेर का दावा
कोर्ट में पेश दस्तावेज में परीक्षा की OMR शीट को लेकर भी बेहद गंभीर आरोप हैं. दस्तावेज के अनुसार, FRO परीक्षा की 350 से अधिक OMR शीट और ACF परीक्षा की 150 से अधिक OMR शीट में कथित तौर पर हेरफेर किए जाने का दावा किया गया है. इस तरह दोनों परीक्षाओं की 500 से ज्यादा OMR शीट जांच के घेरे में हैं. इसके साथ ही आरोप है कि केवल कागज पर मौजूद OMR उत्तर पुस्तिकाओं में ही बदलाव नहीं किया गया, बल्कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली और सर्वर में भी कथित छेड़छाड़ की गई.
उत्तर पुस्तिकाओं को सुरक्षित स्थान से निकालने का भी आरोप
कोर्ट में पेश दस्तावेज में एक और गंभीर बात बताई गई है. इसमें कहा गया है कि आरोपियों द्वारा मूल उत्तर पुस्तिकाओं को सुरक्षित स्थान से बाहर निकालकर दोबारा लिखवाने या उनमें बदलाव करने की कोशिश की गई. आरोप के मुताबिक, यह काम पैसे के बदले किया जाता था. इसका मतलब यह है कि परीक्षा खत्म होने के बाद भी कथित तौर पर कुछ उत्तर पुस्तिकाओं तक पहुंच बनाने और उनमें बदलाव करने की कोशिश की गई. सीआईडी के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि ऐसी उत्तर पुस्तिकाएं कौन-सी थीं, उन्हें किसने संभाला और सुरक्षित स्थान से बाहर निकालने की प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे.
अभ्यर्थियों से मूल प्रमाणपत्र और खाली हस्ताक्षर वाले कागज लेने का आरोप
जांच में अभ्यर्थियों से संबंधित एक और चौंकाने वाली बात सामने आने का दावा किया गया है. दस्तावेज के अनुसार, कथित तौर पर अभ्यर्थियों से मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र, कैंसिल चेक, हस्ताक्षर किए हुए खाली स्टांप पेपर और खाली हस्ताक्षर किए हुए A-4 पेपर लिए जाते थे. इन दस्तावेजों का इस्तेमाल पैसे की लेन-देन को सुरक्षित रखने या अभ्यर्थियों पर दबाव बनाने के लिए किए जाने की बात सामने आ रही है.
लखनऊ कार्यालय में कथित 'सीक्रेट सेल' चलाने का आरोप
जांच में परीक्षा कराने वाली एजेंसी TDPL के लखनऊ स्थित कार्यालय की भूमिका भी सामने आई है. दस्तावेज में लखनऊ के FF-67, आदर्श कॉम्प्लेक्स, जानकीपुरम स्थित TDPL कार्यालय का उल्लेख किया गया है. आरोप है कि कंपनी के निदेशक सत्यपाल, रणवीर तथा कर्मचारियों मोहम्मद उस्मान और मोहम्मद अवध के साथ मिलकर परीक्षा में कथित धोखाधड़ी के लिए एक 'सीक्रेट सेल' चलाया जा रहा था.
JSSC-CGL पेपर लीक मामले में भी आरोपी है अभय तिवारी
मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी का नाम इससे पहले भी परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मामले में सामने आ चुका है. दस्तावेज के अनुसार, वह JSSC-CGL परीक्षा पेपर लीक मामले में पहले से आरोपी है. इस मामले में नामकुम थाना कांड संख्या 45/2024 का उल्लेख किया गया है. इस मामले में IPC की धारा 467, 468, 420 और 120B के अलावा झारखंड प्रतियोगी परीक्षा अधिनियम, 2023 की धारा 12 और आईटी एक्ट की धारा 64 का भी उल्लेख दस्तावेज में किया गया है.
जांच का दायरा बढ़ा
अभय तिवारी के खिलाफ पहले से दर्ज JSSC-CGL मामले और अब JPSC की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के आरोप पहले ही सामने आ चुके हैं. ऐसे में सीआईडी जांच का दायरा बेहद व्यापक हो गया है. जांच का फोकस केवल अभय तिवारी तक सीमित नहीं है.
एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि अभय तिवारी के संपर्क में कौन-कौन लोग थे? TDPL में उनकी वास्तविक भूमिका क्या थी? किन अधिकारियों या कर्मचारियों तक उनकी पहुंच थी? किन अभ्यर्थियों से पैसे लिए गए? किन अभ्यर्थियों को कथित तौर पर फायदा मिला? अभय के परिवार और रिश्तेदारों ने कौन-कौन सी परीक्षाएं दीं और इनमें कितने लोग सफल हुए? CID अब परीक्षा रिकॉर्ड, OMR शीट, डिजिटल डाटा, सर्वर लॉग, अभ्यर्थियों से जुड़े दस्तावेज और आरोपियों के बीच संपर्क जैसे अलग-अलग पहलुओं को जोड़कर मामले की कड़ियां तलाश रही है.
यहां बता दें कि सीआईडी ने पूर्व में जो दस्तावेज कोर्ट में दिए थे उसमें अभय तिवारी के पिता के भी कुछ परीक्षाओं में शामिल होने की बात कही गई थी. हालांकि बाद में सीआईडी कोर्ट में आवेदन देकर बताया कि टाइपिंग मिस्टेक की वजह से अभय तिवारी के पिता की संलिप्तता बात आई है, कृप्या उसे सुधारा जाय. जिसके बाद कोर्ट ने आवेदन को स्वीकार कर लिया. हालांकि अदालत ने यह भी साफ किया कि बाकी सारे पैराग्राफ यथावत रहेंगे.
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