LU हॉस्टल संकट: सीटें बढ़ीं पर हॉस्टल नहीं, 26 हजार छात्रों पर सिर्फ 3000 बेड, दो दशकों से नहीं बना मुख्य परिसर में नया हॉस्टल!
LU हॉस्टल संकट: सीटें बढ़ीं पर हॉस्टल नहीं, 26 हजार छात्रों पर सिर्फ 3000 बेड, दो दशकों से नहीं बना मुख्य परिसर में नया हॉस्टल! लखनऊ विश्वविद्यालय की बड़ी समस्या कैसे होगी दूर?, पढ़िए संवाददाता सतीश सिंह की यह खास रिपोर्…

सौजन्य से:- ETV Bharat
LU हॉस्टल संकट: सीटें बढ़ीं पर हॉस्टल नहीं, 26 हजार छात्रों पर सिर्फ 3000 बेड, दो दशकों से नहीं बना मुख्य परिसर में नया हॉस्टल!
लखनऊ विश्वविद्यालय की बड़ी समस्या कैसे होगी दूर?, पढ़िए संवाददाता सतीश सिंह की यह खास रिपोर्ट.
By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : October 6, 2026 at 8:24 AM IST
|Updated : October 6, 2026 at 8:31 AM IST
लखनऊ: देश और प्रदेश के अग्रणी शैक्षणिक संस्थानों में शामिल लखनऊ विश्वविद्यालय NAAC A++ की ग्रेडिंग का ढिढोरा तो पीट रहा है पर, छात्र सुविधाओं के नाम पर विवि आर्थिक संकट का रोना रो रहा है. लिहाजा, विवि में लखनऊ को छोड़कर अन्य जिलों से आने वाले छात्रों को सिर छिपाने के हॉस्टल के बजाय किराए के मकानों में शरण लेनी पड़ी रहा है.
यूपी में सिर्फ दो विश्वविद्यालयों को ये दर्जा
विवि को लखनऊ विश्वविद्यालय अधिनियम 1920 के तहत आवासीय विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त है. पूरे प्रदेश की अगर बात करें तो लखनऊ विश्वविद्यालय को छोड़ केवल गोरखपुर विश्वविद्यालय को आवासीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिला हुआ है. इसके अलावा पूर्व में इलाहाबाद विश्वविद्यालय भी आवासीय विश्वविद्यालय हुआ करता था लेकिन केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के बाद वर्तमान में केवल दो ही विश्वविद्यालय प्रदेश में आवासीय विश्वविद्यालय के रूप में शामिल हैं.
18 हॉस्टल, सीटें 3000
लखनऊ विश्वविद्यालय के पास वर्तमान में कुल 18 छात्रावास हैं। जिनमे 5 छात्रावास नवीन परिसर में हैं जबकि 12 हॉस्टल मुख्य परिसर में है. वहीं बलरामपुर हॉस्टल विवि परिसर से थोड़ी दूर स्थित है. इन छात्रावासों 3000 हजार के करीब सीटें है जिनका आवंटन विवि की तरफ से नए व पुराने छात्रों को किया जाता है.
विवि में नव प्रवेशित और पुराने छात्रों की बात करें तो 26000 के करीब छात्र हैं. इस साल विवि की तरफ से 13078 नव प्रवेशित छात्रों को प्रवेश दिया गया है. इनमें इस बार नए कोर्स शुरू कर विवि की तरफ से 3800 सीटों की वृद्धि भी शामिल है. वहीं तकरीबन 5 से 7000 छात्र हर साल विवि से पढ़ाई पूरी कर बाहर निकलते हैं. यदि कुल 26000 हजार छात्रों के आंकड़ों पर गौर करें तो लगभग 5 से 6000 की संख्या में ही स्थानीय छात्र होते हैं जिन्हें हॉस्टल की जरूरत नही होती है. बाकी बचे 19 से 20000 हजार छात्र-छात्राओं के लिए हॉस्टल की जरूरत होती है जिनमे बड़ी संख्या में नव प्रवेशित छात्र होते हैं , जो दाखिला मिलने के बाद तुरंत हॉस्टल के लिए आवेदन करते हैं जबकि हॉस्टलों में महज 3000 सीट होने के चलते बाकी बचे छात्र किराए के कमरों में शरण लेने को मजबूर होते हैं.
विश्वविद्यालय के 18 हॉस्टलों पर प्रकाश डालें तो नवीन परिसर में कुल पांच छात्रावास हैं जिनमे कौटिल्य छात्रावास में एमबीए वीबीए बीएससी बीटेक एमसीए के छात्रों को आमंत्रित किया जाता है जबकि होमी जहांगीर भाभा छात्रावास विधि के छात्रों को आवंटित किया जाता है इसी तरह बी आर अंबेडकर छात्रावास लावण्या छात्रावास और गंगा छात्रावास में विधि के साथ ही बीटेक बीसीए व एमबीए की छात्राओं को आवंटित किया जाता है. इनमें लावण्या और गंगा दोनों सेल्फ फाइनेंस हॉस्टल है.वहीं, बात मुख्य परिसर की करें तो सुभाष छात्रावास बीए बीएससी बीकॉम एमए के नव प्रवेशित छात्रों को आवंटित किया जाता है. वही एलबीएस छात्रावास में टॉपर छात्रों को रखा जाता है जबकि आचार्य नरेंद्र देव छात्रावास में विदेशी छात्रों को रखा जाता है. बीरबल साहनी छात्रावास में विदेशी छात्राओं को सीट आवंटित होती है जबकि गोल्डन जुबली में पीएचडी, चंद्रशेखर छात्रावास में बीएससी की छात्राओं को, महमूदाबाद छात्रावास में कई कोर्सों के छात्रों को रखा जाता है. इसी तरह हबीबुल्लाह छात्रावास में भी अलग अलग कोर्सों के छात्रों को रखा जाता है. वहीं, तिलक छात्रावास में बीए-बीकॉम की छात्राओं को, कैलाश छात्रावास में परास्नातक की छात्राओं को, निवेदिता हॉस्टल में सेल्फ फाइनेंस कोर्स में पढ़ने वाली छात्राओं को सीट आवंटित की जाती है जबकि बलरामपुर छात्रावास पीएचडी के छात्रों के लिए आरक्षित है. वही आरएस विष्ट छात्रावास फाइन आर्ट के छात्रों के लिए है.
बात अगर नए हॉस्टल के निर्माण की करें तो मुख्य परिसर के अधीन निवेदिता हॉस्टल का निर्माण 1995 में कराया गया था. इसके बाद मुख्य परिसर में कोई नए हॉस्टल का निर्माण नही हुआ. वहीं नवीन परिसर में विवि के कुलपति रहे प्रो. एसपी सिंह के कार्यकाल में नवीन परिसर में दो हॉस्टल का निर्माण कराया गया था. अगर विवि के पुराने हॉस्टल की बात करें तो 1934 में हबीबुल्लाह हॉस्टल का निर्माण शुरू किया गया था. 1938 में बन कर तैयार होने के बाद इसमें पहला आवंटन 1942 में किया गया था.
अलग-अलग हॉस्टल के लिए अलग-अलग शुल्क
कुछ हॉस्टलों को अगर छोड़ दें तो बाकी सभी छात्रों के लिए हॉस्टल की फीस 4800 रुपये साल का निश्चित है. इसके अलावा 2250 रुपए की काशन मनी जमा होती है जिसमें 1000 छात्रों को बाद में वापस कर दिया जाता है. वही सेल्फ फाइनेंस और विशेष श्रेणी के छात्रावासों के लिए अलग शुल्क निर्धारित है जिसमें निवेदिता हॉस्टल के लिए 15600 और 2250 रुपए का काशन मनी जमा होती है. जिसमें 1000 बाद में रिफंड कर दिए जाते हैं। इसी तरह लाल बहादुर शास्त्री छात्रावास में सिंगल सीट होने के चलते 5400 लिए जाते हैं. इनके अलावा 2250 रुपए काशन मनी जमा होती है। जिसमें से 1000 पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्रों को वापस कर दिया जाता है. वही नवीन परिसर स्थित लावण्या और गंगा छात्रावास का रूम रेंट 24000 निश्चित है. इसके अलावा 6300 काशन मनी जमा होती है। जिसमे 5000 वापस कर दिया जाता है.
अलग अलग शुल्क लिए जाते
छात्रावास में रहने वाले अंतर्वासी छात्र छात्राओं के लिए विश्वविद्यालय की तरफ से मेस शुल्क लिए जाते हैं जिसमे छात्राओं से 82 रुपए 40 पैसे प्रतिदिन का चार्ज किया जाता है. इसमें सुबह शाम नाश्ता और दो टाइम का भोजन शामिल होता है. वही छात्रों से एक दिन का 107 रुपए डाइट शुल्क लिया जाता है जिसमें एक टाइम का नाश्ता और दो टाइम का भोजन शामिल रहता है.
किराए का कमरा लेने को मजबूर
विवि में प्रवेशित छात्रों की संख्या के मुकाबले काफी संख्या ऐसे छात्र हैं, जिनके अभिभावक विवि को भारी भरकम शुल्क तो अदा करते हैं पर उनके बच्चे किराए के कमरे लेने को मजबूर हैं जिसके चलते विवि के आसपास किराए के कमरों का रेंट अधिक होता है. कुछ छात्र सस्ते के चक्कर मे विवि से 10 किमी दूरी पर कमरा लेने को मजबूर हैं विवि के समीप डालीगंज, मनकामेश्वर, चाँदगंज, बाबूगंज, निशातगंज, आईटी, न्यू हैदराबाद और निशातगंज जैसे इलाको में 8 से 10 हजार के कमरे छात्रों को लेने पड़ते हैं. यह बात दीगर है कि एक कमरे में 3 से 4 छात्र शामिल होते हैं. यदि इन इलाकों में किराए के फ्लैट की बात करें तो 16 से 18 हजार रुपये प्रतिमाह छात्रों को केवल रहने के लिए खर्च करने पड़ते हैं.
कमरों का किराया अधिक रहता है
प्रॉपर्टी डीलर जेडी गुप्ता ने बताया कि विश्वविद्यालय के समीप के इलाकों में रूम रेंट काफी अधिक रहता है. इसके पीछे कारण छात्र विवि के नजदीक रहना ज्यादा पसंद करते हैं जिसके चलते पूर्व निर्धारित किराए में हर साल 10 फीसद की बढ़ोतरी होती रहती है. एक और प्रॉपर्टी डीलर सोनी ने बताया कि विवि के नजदीक के इलाकों में रूम की मांग अधिक रहती है इसलिए ऊंचे दाम पर लोग किराए पर कमरा देते हैं.
पढ़ाई करनी है तो कमरा किराए पर लेना है
विश्वविद्यालय से पीएचडी की पढ़ाई कर रहा है आशुतोष सिंह ने बताया कि वे कई बार आवंटन के लिए आवेदन कर चुके हैं मगर उन्हें हॉस्टल आवंटित नहीं हुआ. इसके चलते पढ़ाई के लिए किराए पर कमरा लिए हुए हैं. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल टॉपर छात्रों को ही मेरिट के आधार पर हॉस्टल आवंटन करता है, इसलिए उनका आवंटन नहीं हो सका. वही बीसीए की पढ़ाई कर रहे हैं अखिलेश ने बताया कि हॉस्टल आवंटन के लिए आवेदन किया था पर मेरिट में ना आने के चलते उन्हें हॉस्टल नहीं मिला. वह अपने पार्टनर के साथ किराए पर कमरा लेकर पढ़ाई करते हैं.
छात्रों की संख्या के मुकाबले हॉस्टल की कमी
प्रवेशित छात्रों के हॉस्टल की कमी की बात को स्वीकारते हुए विश्वविद्यालय की छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रोफेसर अमित कनौजिया ने कहा कि विश्वविद्यालय के पास जो भी हॉस्टल है, उनकी पूरी क्षमता का उपयोग विश्वविद्यालय प्रशासन कर रहा है. विश्वविद्यालय में हर साल नव प्रवेशित छात्रों के साथी पुराने छात्रों को भी री आवंटन किया जाता है. लिमिटेड सीट होने की वजह से काफी संख्या में छात्रों को हॉस्टल नहीं मिल पाता है. विवि अपने रिसोर्सेज से केवल हॉस्टलों की मरम्मत ही करा पाता है क्योंकि विवि को पूर्व में जितनी भी ग्रांट विवि को मिलती थी, उनको शासन की तरफ से फ्रिज किया जा चुका है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर जेपी सैनी की तरफ से इस बाबत प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था।जिसमें एक प्रस्ताव पर शासन का अनुमोदन भी मिल चुका है. जल्द ही इस दिशा में कदम उठाया जाएगा.
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