स्कूल शिक्षा में MP की परीक्षा, 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 27वें स्थान पर, रिपोर्ट ने चौंकाया
स्कूल शिक्षा में MP की परीक्षा, 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 27वें स्थान पर, रिपोर्ट ने चौंकाया केंद्र सरकार की शिक्षा मंत्रालय के सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा, देश के टॉप जिलों की रेस से बाहर हुआ प्रदेश. विश…

सौजन्य से:- etvbharat.com
स्कूल शिक्षा में MP की परीक्षा, 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 27वें स्थान पर, रिपोर्ट ने चौंकाया
केंद्र सरकार की शिक्षा मंत्रालय के सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा, देश के टॉप जिलों की रेस से बाहर हुआ प्रदेश. विश्वास चतुर्वेदी की रिपोर्ट.
By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : August 31, 2026 at 2:50 PM IST
भोपाल: मध्य प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को लेकर जारी केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट ने सरकार के दावों की पोल खोलकर रख दी है. प्रदेश के 55 जिलों में से एक भी जिला 600 में 360 अंक यानी 60 प्रतिशत का स्तर भी हासिल नहीं कर सका. हालांकि, सीधी 333 अंकों के साथ प्रदेश में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला जिला रहा, लेकिन वह भी तय सीमा से 27 अंक पीछे है.
जबकि राजधानी भोपाल को 285 और इंदौर को 284 अंक मिले हैं. वहीं, झाबुआ 226 अंकों के साथ सबसे नीचे रहा. राष्ट्रीय स्तर पर बात करें तो मध्य प्रदेश 1000 में 566.8 अंक के साथ 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 27वें स्थान पर है.
जीतू पटवारी ने सरकार पर साधा निशाना
इस रिपोर्ट को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि, ''केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की जिला शिक्षा प्रदर्शन रिपोर्ट ने प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति सामने ला दी है. जब 55 में से एक भी जिला 60 प्रतिशत तक नहीं पहुंच सका तो सरकार के शिक्षा व्यवस्था को लेकर किए जा रहे दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है.''
छोटे जिलों का प्रदर्शन बड़े शहरों से बेहतर
इस रिपोर्ट में कई छोटे जिलों ने प्रदेश के बड़े शहरों को पीछे छोड़ दिया है. सीधी के बाद उज्जैन 323, शाजापुर 318, दमोह 312 और नरसिंहपुर 307 अंक पर रहा. सागर को 301 और नीमच को 299 अंक मिले हैं. वहीं, दूसरी ओर भोपाल 285, इंदौर 284, ग्वालियर 277 और जबलपुर 267 अंक ही हासिल कर सका. इसके अलावा सीधी और झाबुआ के बीच 107 अंकों का अंतर है, जो जिलों के प्रदर्शन में बड़ा फासला दिखाता है.
6 को छोड़, 45 जिले दूसरी श्रेणी में
जिला स्तर पर प्रदर्शन की श्रेणियों में प्रदेश के छह जिले प्रयास-1, जबकि 45 जिले प्रयास-2 में शामिल हैं. चार जिले प्रयास-3 में हैं. आंकड़े बताते हैं कि अधिकांश जिलों को अभी स्कूली शिक्षा के प्रदर्शन में लंबी दूरी तय करनी है. रिपोर्ट में विद्यार्थियों के सीखने के स्तर के साथ स्कूल सुविधाओं, सुरक्षा, डिजिटल शिक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था जैसे पहलुओं को भी आकलन में शामिल किया गया है.
पंजाब-केरल से आसमान-जमीन का अंतर
राष्ट्रीय स्तर पर भी मध्य प्रदेश की स्थिति बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों की तुलना में कमजोर रही. पंजाब 723.6 और केरल 716.8 अंक के साथ आगे हैं. वहीं महाराष्ट्र को 654.6 और ओडिशा को 651.5 अंक मिले. पड़ोसी राज्यों में उत्तर प्रदेश 579.9 और छत्तीसगढ़ 578.9 अंक के साथ मध्य प्रदेश से आगे हैं. जबकि बिहार 564.8 अंक के साथ एमपी से थोड़ा पीछे है.
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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस रिपोर्ट को लेकर सरकार पर निशाना साधा है. उनका कहना है कि, ''केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की जिला शिक्षा प्रदर्शन रिपोर्ट ने प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति सामने ला दी है.'' पटवारी ने कहा कि, ''जब 55 में से एक भी जिला 60 प्रतिशत तक नहीं पहुंच सका तो सरकार के शिक्षा व्यवस्था को लेकर किए जा रहे दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है.'' उन्होंने डिजिटल शिक्षा, स्कूल सुरक्षा और विद्यार्थियों के सीखने के स्तर को लेकर भी चिंता जताई. पटवारी ने सरकार से रिपोर्ट की गंभीरता से समीक्षा कर कमजोर क्षेत्रों की पहचान करने और शिक्षा व्यवस्था में ठोस सुधार के कदम उठाने की मांग की.
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