स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर शिक्षा विभाग सख्त
स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर शिक्षा विभाग सख्त बड़ौत में शिक्षा विभाग ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाए हैं। सभी स्कूलों में परिवहन सुरक्षा समिति का गठन अनिवार्य किया गया है। प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी…

सौजन्य से:- Hindustan
स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर शिक्षा विभाग सख्त
बड़ौत में शिक्षा विभाग ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाए हैं। सभी स्कूलों में परिवहन सुरक्षा समिति का गठन अनिवार्य किया गया है। प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी होगी कि नियमित बैठकें कराई जाएं और वाहनों की सुरक्षा जांच की जाए। छात्राओं के लिए महिला हेल्पर की तैनाती जरूरी होगी।
बड़ौत। स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। प्रदेश के सभी स्कूलों में परिवहन सुरक्षा समिति (एसटीएससी) का गठन अनिवार्य किया गया है। समिति की नियमित बैठक कराने की जिम्मेदारी प्रधानाचार्य और स्कूल प्रबंधन की तय की गई है। इसके माध्यम से स्कूली वाहनों की फिटनेस, सुरक्षा उपकरण और सुरक्षित संचालन की नियमित समीक्षा की जाएगी। शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुसार स्कूलों में संचालित वाहनों की स्थिति और सुरक्षा मानकों की जांच पर विशेष ध्यान देना होगा। प्रत्येक वाहन में हेल्पर की तैनाती अनिवार्य होगी। वहीं, छात्राओं के सफर करने की स्थिति में महिला हेल्पर की तैनाती जरूरी होगी।
इससे बच्चों की यात्रा को अधिक सुरक्षित बनाने और किसी भी तरह की लापरवाही पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। मिशन सेफ फ्यूचर 3.0 के बाद स्कूलों में परिवहन सुरक्षा समितियों के गठन और उनकी सक्रियता को लेकर कई कमियां सामने आई थीं। इसके बाद शिक्षा विभाग ने समितियों को प्रभावी बनाने पर जोर दिया है। स्कूल प्रबंधन को सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना होगा। नियमों की अनदेखी या लापरवाही सामने आने पर संबंधित स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई की जा सकती है। एआरटीओ विपिन कुमार का भी कहना है कि स्कूल संचालकों को निर्देशित कर दिया है कि नियमों को गम्भीरता से लेकर पालन करें। लापरवाही बरतने की स्थिति में स्कूल के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।
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