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छोटे B-school से 35,000 छात्रों वाली यूनिवर्सिटी तक—विज्ञापनों के दम पर खड़ा LPU का शिक्षा साम्राज्य

नई दिल्ली: 2001 में 280 छात्रों से लेकर आज 35,676 छात्रों तक, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) ने पंजाब के फगवाड़ा में एक छोटे बिजनेस और आईटी स्कूल से लंबा सफर तय किया है. अब यह एक ऐसी यूनिवर्सिटी है, जिसके 86.5 प्रतिशत…

29 सितंबर 2026 को 10:02 am बजे
छोटे B-school से 35,000 छात्रों वाली यूनिवर्सिटी तक—विज्ञापनों के दम पर खड़ा LPU का शिक्षा साम्राज्य

सौजन्य से:- ThePrint Hindi

नई दिल्ली: 2001 में 280 छात्रों से लेकर आज 35,676 छात्रों तक, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) ने पंजाब के फगवाड़ा में एक छोटे बिजनेस और आईटी स्कूल से लंबा सफर तय किया है. अब यह एक ऐसी यूनिवर्सिटी है, जिसके 86.5 प्रतिशत छात्र भारत के दूसरे राज्यों से आते हैं.

इस बदलाव की शुरुआत 2005 में हुई, जब ग्रुप के प्रोफेशनल इंस्टीट्यूट्स के नेटवर्क को पंजाब के एक कानून के तहत LPU के रूप में एक साथ लाया गया.

2010 की LPU पर एक केस स्टडी, जो यूनिवर्सिटी के अपने आंकड़ों पर आधारित थी, बताती है कि यूनिवर्सिटी अपनी शुरुआत के एक दशक के अंदर ही 2009-10 तक 25,000 छात्रों का आंकड़ा पार कर गई थी.

2023 में द इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में LPU के वाइस-प्रेसिडेंट अमन मित्तल ने कहा था कि शुरुआत में यूनिवर्सिटी में ज्यादातर छात्र पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से आते थे. बाद में यूनिवर्सिटी ने मध्य, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम भारत तक अपना दायरा बढ़ाया. National Institutional Ranking Framework (NIRF) के आंकड़े भी इस विस्तार और आकर्षण को दिखाते हैं.

LPU में 2021 में 31,526 और 2025 में 35,676 छात्र थे. इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण छात्रों की बदलती संख्या थी: 2021 में पंजाब के छात्र कुल छात्रों का 11.8 प्रतिशत थे, जो 2025 में घटकर 8.8 प्रतिशत रह गए. वहीं पिछले साल तक दूसरे राज्यों के छात्र कुल छात्रों का 86.5 प्रतिशत थे.

शुरुआत के दो दशक से ज्यादा समय बाद LPU अब एक महिला छात्रा के कैंपस में यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद हुए छात्र प्रदर्शनों को लेकर सुर्खियों में है.

27 सितंबर का प्रदर्शन हिंसक हो गया. छात्रों ने संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, कुछ चीजों में आग लगा दी और कैंपस के ठीक बाहर नेशनल हाईवे-44 को बंद कर दिया. पुलिस ने एफआईआर दर्ज की और जांच के लिए एसआईटी बनाई. LPU ने आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि कथित घटना हुई ही नहीं. यूनिवर्सिटी ने दावों को झूठा, बेबुनियाद और मनगढ़ंत बताया है.

इस बीच, LPU ने घटना को लेकर फैल रहे दावों को खारिज कर दिया. रविवार को जारी एक बयान में रजिस्ट्रार मोनिका गुलाटी ने आरोपों को “झूठा, बेबुनियाद और मनगढ़ंत” बताया और कहा कि सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाई जा रही है.

इसके बाद सोमवार को जारी एक बयान में LPU के वाइस-चांसलर जसपाल सिंह संधू ने कहा कि यूनिवर्सिटी जांच में सहयोग करने के लिए तैयार है और उसका कहना है कि “छिपाने के लिए कुछ नहीं है”. यूनिवर्सिटी ने अशांति के लिए बाहरी लोगों को भी जिम्मेदार बताया, जिनके कथित तौर पर कैंपस में घुसने और शांति भंग करने की बात कही गई.

LPU की प्रो-चांसलर रश्मि मित्तल ने सोमवार देर रात एक वीडियो संदेश में छात्रों से अपील की कि वे सोशल मीडिया पर चल रहे दावों पर आंख बंद करके भरोसा न करें और किसी भी जानकारी के लिए यूनिवर्सिटी के अधिकारियों से संपर्क करें. उन्होंने घटना को “बहुत, बहुत दुर्भाग्यपूर्ण” बताया और आरोप लगाया कि बाहरी लोग भी अशांति में शामिल हुए थे. मित्तल ने कहा कि तोड़फोड़ और अशांति में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने छात्रों से शांत रहने और पढ़ाई पर ध्यान देने की भी अपील की.

दिप्रिंट ने LPU के संस्थापक चांसलर और राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल से भी इस बारे में प्रतिक्रिया मांगी है. उनका जवाब मिलने पर इस रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा.

इसी पृष्ठभूमि में दिप्रिंट यह देख रहा है कि लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी ने बड़े पैमाने पर विज्ञापन अभियान के सहारे किस तरह विस्तार किया, अलग-अलग यूनिवर्सिटी रैंकिंग में उसकी स्थिति क्या है और कैंपस की जिंदगी को लेकर मौजूदा और पूर्व छात्रों का क्या कहना है.

अकादमिक विस्तार

LPU का अकादमिक प्रोफाइल अभी भी मुख्य रूप से अंडरग्रेजुएट लेवल के छात्रों पर आधारित है. 2023-24 में इसके चार साल के अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम में 23,367 छात्र थे, जो कुल छात्रों का करीब दो-तिहाई था.

इसके अकादमिक दायरे में भी काफी विस्तार हुआ है. LPU अभी 40 से ज्यादा विषयों में 150 से ज्यादा प्रोग्राम चलाता है. इनमें डिप्लोमा और अंडरग्रेजुएट कोर्स से लेकर पोस्टग्रेजुएट और डॉक्टरेट प्रोग्राम तक शामिल हैं.

LPU का विस्तार NIRF की University category में भी दिखाई देता है. 2021 में इसकी रैंक 62 थी, जो 2024 में बढ़कर 27 हो गई. इसके बाद 2025 में यह 31वें स्थान पर रही. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टाइम्स हायर एजुकेशन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में भी इसकी रैंकिंग बैंड 2022 में 1,001–1,200 से सुधरकर 2026 में 501–600 हो गई.

NIRF 2025 के यूनिवर्सिटी दस्तावेज के मुताबिक, LPU के चार साल के अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम में प्लेसमेंट पाने वाले छात्रों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी है. 2019-20 में 4,929 ग्रेजुएट्स में से 2,450 छात्रों को प्लेसमेंट मिला था. 2023-24 में 5,150 ग्रेजुएट्स में से 4,417 छात्रों को प्लेसमेंट मिला.

इसी अवधि में प्लेसमेंट पाने वाले ग्रेजुएट्स की औसत यानी median सालाना सैलरी भी 4 लाख रुपये से बढ़कर 7.4 लाख रुपये हो गई.

रिसर्च का आंकड़ा अलग दिशा दिखाता है. LPU के 2021 के NIRF रिकॉर्ड में 2,336 PhD स्कॉलर्स थे, जबकि 2025 में यह संख्या 2,024 थी. हालांकि, इसके PhD छात्रों की संरचना में बड़ा बदलाव आया. फुल-टाइम स्कॉलर्स की संख्या 544 से बढ़कर 899 हो गई.

LPU की अंतरराष्ट्रीय पहुंच भी देश में उसके विस्तार के साथ बढ़ी है. उसके 2025 के NIRF रिकॉर्ड के मुताबिक, यहां 1,648 अंतरराष्ट्रीय छात्र थे, जो कुल छात्रों का 4.6 प्रतिशत हैं.

यूनिवर्सिटी की 2025 की ग्रेजुएशन रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय छात्र जिम्बाब्वे, तंजानिया, मंगोलिया, म्यांमार, यमन, मोरक्को, सूडान, दक्षिण सूडान, आइवरी कोस्ट और नेपाल समेत कई देशों से थे.

‘किफायती विकल्प’—बड़े पैमाने पर किया गया प्रचार

कुछ छात्रों के लिए LPU की खासियत उसकी असल फीस थी, जो स्कॉलरशिप के बाद देनी पड़ती थी, न कि बताई जाने वाली पूरी फीस. 2020 से 2023 तक LPU में बी.कॉम की पढ़ाई करने वाले एक पूर्व छात्र ने बताया कि एमिटी में इसी तरह के कोर्स की फीस प्रति सेमेस्टर 30,000-40,000 रुपये ज्यादा थी, जबकि उसे दोनों जगह की सुविधाएं लगभग एक जैसी लगीं.

पूर्व छात्र ने दिप्रिंट से कहा, “स्कॉलरशिप के बाद मेरी फीस करीब 60,000-70,000 रुपये प्रति सेमेस्टर थी. एमिटी में इसी कोर्स के लिए मुझे हर सेमेस्टर करीब 30,000-40,000 रुपये ज्यादा देने पड़ते. मुझे दोनों यूनिवर्सिटी की सुविधाएं भी लगभग एक जैसी लगीं.”

LPU की वेबसाइट पर दी गई अंडरग्रेजुएट फीस अलग-अलग प्रोग्राम के हिसाब से अलग है. उसके मौजूदा कोर्स में कुछ उदाहरणों के मुताबिक फीस करीब 80,000 रुपये से 1.60 लाख रुपये प्रति सेमेस्टर तक है. हालांकि, स्कॉलरशिप मिलने के बाद छात्रों को असल में देनी पड़ने वाली फीस काफी कम हो सकती है.

एक अन्य पूर्व छात्र ने बताया कि LPU कई तरह की आर्थिक मदद देता था. इसमें मेरिट और जरूरत के आधार पर मिलने वाली स्कॉलरशिप और रक्षा कर्मियों और शिक्षकों के बच्चों के लिए फीस में छूट शामिल थी. छात्र ने अलग-अलग कीमत वाले हॉस्टल के विकल्पों का भी ज़िक्र किया. इनमें दो लोगों से लेकर पांच लोगों के रहने वाले कमरे शामिल थे, जिससे छात्र अपने बजट के हिसाब से विकल्प चुन सकते थे.

एक और पूर्व छात्र ने 2017 से 2020 तक LPU में फिल्म प्रोडक्शन की पढ़ाई की थी. उसके लिए यूनिवर्सिटी का मार्केटिंग कैंपेन उसकी लोकप्रियता की एक बड़ी वजह था.

द इंडियन एक्सप्रेस ने 8 अगस्त 2010 की एक रिपोर्ट में TAM Media Research के आंकड़ों का हवाला दिया था. इसके मुताबिक, उस साल की पहली छमाही में शिक्षा क्षेत्र में टीवी और प्रिंट पर विज्ञापन देने वाले बड़े विज्ञापनदाताओं में LPU भी शामिल था. 2010 की वह केस स्टडी, जिसे IIM लखनऊ में Strategic Management Forum के वार्षिक सम्मेलन में पेश किया गया था, के मुताबिक LPU टीवी, रेडियो, अखबार, इंटरनेट और आउटडोर मीडिया में विज्ञापन पर हर साल 5-6 करोड़ रुपये खर्च कर रहा था. इस अभियान का मकसद छात्रों के साथ-साथ नौकरी देने वाली कंपनियों के बीच भी अपना ब्रांड बनाने का था.

पूर्व छात्र ने दिप्रिंट से कहा, “जब मैं 12वीं कक्षा में था, तब टीवी, रेडियो और होर्डिंग्स पर हमें हर जगह LPU के विज्ञापन ही दिखाई देते थे. जब मैंने प्राइवेट यूनिवर्सिटी में जाने का फैसला किया, तो सबसे पहले मेरे दिमाग में LPU का ही नाम आया.”

उत्तर प्रदेश के रहने वाले इस छात्र ने बताया कि गोरखपुर में LPU के क्षेत्रीय कार्यालय की वजह से वह पंजाब जाए बिना एडमिशन की प्रक्रिया पूरी कर सका.

उसने कहा, “इसके बारे में भी हमें विज्ञापनों से ही पता चला था.”

LPU के छात्र और पूर्व छात्र कैंपस के अनुभव को लेकर बंटे हुए

दिप्रिंट से बात करने वाले छात्रों और पूर्व छात्रों ने LPU में अपने अनुभव को लेकर अलग-अलग बातें बताईं. कुछ ने कहा कि यूनिवर्सिटी ने उन्हें अलग-अलग तरह के अनुभव, अच्छी पढ़ाई और इंडस्ट्री से जुड़े मौके दिए. उन्होंने नौकरी और प्लेसमेंट के अवसर मिलने की भी बात कही. वहीं कुछ अन्य छात्रों ने कैंपस की जिंदगी को “पाबंदियों वाली” बताया. उन्होंने छात्रों के व्यवहार और सार्वजनिक तौर पर बोलने को लेकर यूनिवर्सिटी के कई नियमों की ओर इशारा किया.

LPU के Prospectus Part C में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक या इंटरनेट मीडिया के जरिए ऐसी किसी भी गतिविधि को प्रकाशित या फैलाना अनुशासनहीनता बताया गया है, जिसे यूनिवर्सिटी, उसके शिक्षकों, कर्मचारियों या छात्रों के लिए नुकसानदायक माना जाए.

इसमें छात्रों को अपनी पढ़ाई, दूसरे छात्रों या “यूनिवर्सिटी से जुड़े किसी भी अन्य मामले” के बारे में मीडिया या जनता को बयान देने या जानकारी साझा करने से भी रोका गया है. इसी हिस्से में कैंपस के अंदर और बाहर walkout, हड़ताल, आंदोलन, अभियान या किसी भी तरह के विरोध में शामिल होने को भी अनुशासनहीनता बताया गया है.

छात्रों की आवाज पर नियंत्रण का यह सवाल हाल के प्रदर्शनों के दौरान भी सामने आया है.

LPU के एक वीडियो में यौन उत्पीड़न के आरोपों पर जवाब देते हुए दिखाई गई तीन महिला छात्रों ने बाद में मीडिया को बताया कि उन्हें क्या बोलना है, इसके बारे में निर्देश दिए गए थे. उन्होंने कहा कि वीडियो के कुछ हिस्से एडिट किए गए और इसे “उनकी सहमति के बिना” पोस्ट किया गया.

वीडियो को लेकर उनके दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है. LPU ने यौन उत्पीड़न के आरोपों से इनकार किया है.

ऊपर बताए गए एक पूर्व छात्र ने 2017 में कैंपस में हुए एक प्रदर्शन को याद किया. यह प्रदर्शन कुछ छात्रों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई किए जाने के बाद हुआ था.

उसने कहा, “कुछ छात्रों को सस्पेंड कर दिया गया था और कुछ पर जुर्माना लगाया गया था. इस बार भी यूनिवर्सिटी निश्चित रूप से कड़ी कार्रवाई करेगी.”

नवंबर 2017 की मीडिया रिपोर्टों में भी पुष्टि हुई थी कि सैकड़ों छात्रों ने प्रदर्शन किया था, NH-1 को बंद कर दिया था और पुलिस से उनकी झड़प हुई थी. यह प्रदर्शन एक छात्र को कथित तौर पर मोबाइल फोन चोरी के मामले में हिरासत में लिए जाने के बाद हुआ था.

कुछ छात्रों ने कहा कि यूनिवर्सिटी को भविष्य में कैंपस में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए.

अपना नाम नहीं बताने की शर्त पर एक मौजूदा छात्र ने कहा, “कोई भी यूनिवर्सिटी ऐसी अनुशासनहीनता की अनुमति नहीं देगी. सभी यूनिवर्सिटी के अपने नियम और कानून होते हैं, LPU के भी हैं.”

दिप्रिंट से बात करते हुए कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग (सीएसई) की दूसरे साल की एक छात्रा ने कहा कि यूनिवर्सिटी की सख्त नीति है कि छात्रों को मीडिया से बात करने की अनुमति नहीं है.

उसने कहा, “किसी भी जानकारी के बाहर जाने को ईशनिंदा जैसा माना जाता है और अधिकारी आपके साथ गलत व्यवहार करना शुरू कर देते हैं.”

इस बीच, छात्रों की सबसे बड़ी चिंता अब कैंपस में सुरक्षा को लेकर है.

नाम न बताने की शर्त पर दूसरी छात्रा ने कहा, “इस घटना के बाद हम कैंपस में खुद को सुरक्षित कैसे महसूस करें? यूनिवर्सिटी ने 10 दिन की छुट्टी घोषित की है, इसलिए अभी हम घर जा रहे हैं. लेकिन इसके बाद क्या? 10 दिन बाद हमें फिर उसी कैंपस में लौटना होगा. तब क्या बदलेगा? हमें कैसे पता चलेगा कि हम सुरक्षित हैं?”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

यह भी पढ़ें: ‘महिलाओं को घर में बंद करना समाधान नहीं’, DU छात्रों के प्रदर्शन के समर्थन में राहुल गांधी

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