अंतरराष्ट्रीय स्कूलों को टक्कर देता पंचकूला का सरकारी स्कूल! शिक्षा के साथ खेल, कृषि और विज्ञान में बच्चे बनते हैं आत्मनिर्भर
अंतरराष्ट्रीय स्कूलों को टक्कर देता पंचकूला का सरकारी स्कूल! शिक्षा के साथ खेल, कृषि और विज्ञान में बच्चे बनते हैं आत्मनिर्भर पीएमश्री जीएमएसएसएस हरियाली के बीच एडवांस शिक्षा, खेल और कौशल विकास से नंबर-1 है. पंचकूला से अ…

सौजन्य से:- ETV Bharat
अंतरराष्ट्रीय स्कूलों को टक्कर देता पंचकूला का सरकारी स्कूल! शिक्षा के साथ खेल, कृषि और विज्ञान में बच्चे बनते हैं आत्मनिर्भर
पीएमश्री जीएमएसएसएस हरियाली के बीच एडवांस शिक्षा, खेल और कौशल विकास से नंबर-1 है. पंचकूला से अविनाश शर्मा की रिपोर्ट.
Published : October 4, 2026 at 4:51 PM IST
|Updated : October 4, 2026 at 4:57 PM IST
पंचकूला: सिटी ब्यूटीफुल चंडीगढ़ में 25 गांव शामिल हैं. सेक्टरों समेत सभी गांवों में अनेकों सरकारी स्कूल हैं. लेकिन गांव धनास के पीएमश्री जीएमएसएसएस स्कूल की अत्याधुनिक शिक्षा पद्धति, खेल सुविधाएं, हरियाली और कौशल विकास समेत स्कूल फैकल्टी ऐसी है कि ग्रामीणों के अलावा आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले परिवार भी अपने बच्चों का दाखिला इस स्कूल में करवाना चाहते हैं. नतीजतन इस स्कूल में मौजूदा समय में सुबह-शाम (दो शिफ्ट) में करीब तीन हजार छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं.
स्कूल में 102 शिक्षक हैं कार्यरतः इन छात्रों को निखार कर उनका भविष्य उज्जवल बनाने की जिम्मेदारी निभा रहे स्कूल फैकल्टी में अध्यापक-अध्यापिकाओं समेत कुल 102 शिक्षक हैं. यह शिक्षक स्कूल के समय से पहले अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन शुरू कर देते हैं और ड्यूटी का समय पूरा होने के बाद भी छात्रों के साथ रोजाना शैक्षणिक और उनके कौशल विकास के लिए प्रयत्नशील हैं. स्मार्ट बार्ड से पढ़ाई के साथ छात्रों को प्रकृति से जोड़ते हुए उन्हें अच्छा नागरिक बनाने के मकसद से वेस्ट मटीरियल के इस्तेमाल से अलग-अलग विधाएं भी सिखाई जाती हैं. ईटीवी भारत ने स्कूल प्रिंसिपल जगमोहन कौर और शिक्षक रमेश से बातचीत की.
स्कूल में एजुकेशन पार्क: स्कूल प्रिंसिपल जगमोहन कौर ने बताया कि "छात्रों को पुस्तकों और इंटरनेट के माध्यम से स्मार्ट बोर्ड के जरिए शिक्षित करने के अलावा पढ़ाई में उनकी दिलचस्पी बढ़ाने के लिए उन्हें भौतिक ज्ञान भी दिया जाता है. इसके लिए शिक्षकों ने पीएमश्री के फंड से स्कूल में अलग-अलग विषयों के एजुकेशन पार्क बनाए हैं. इनमें मैथ्स पार्क, साइंस एवं नॉलेज पार्क और किड्स एम्यूजमेंट पार्क भी हैं. इन पार्कों में छात्रों को खेल-खेल में गणित के फार्मूले, आकृतियों के माध्यम से खेल से भी समाधान की दिशा दिखाई जाती है. साइंस पार्क में पुस्तकों के सवालों को महसूस करके सुलझाए जाते हैं. प्रत्येक मॉडल से यह दर्शाया गया है कि हर चीज के पीछे विज्ञान है. चिल्ड्रन पार्क में कल्पनाओं को उड़ान दी जाती है, आत्मविश्वास-सहयोग और भरोसे को महत्वता दी जाती है."
हर्बल पार्क-औषधीय पौधे और सीड्स: शिक्षक रमेश ने बताया कि "शिक्षकों ने स्कूल परिसर में हर्बल पार्क तैयार किए हैं. यहां कई औषधीय पौधे लगाए गए हैं. जहां रसोई घर में सब्जियों में अलग-अलग मसालों डाले जाते हैं, वहीं स्कूल में ऑल स्पाइस नामक पौधा भी है, जिसकी पत्ती को मसलकर सब्जी में डाला जाए तो सुगंध से सब्जी का मज़ा दोगुना हो जाए. यहां श्यामा तुलसी और शुगर के मरीजों के ईलाज के लिए कड़वे पत्तों वाले लेकिन स्वास्थ्यवर्धक पौधे भी हैं. इसके कई प्रकार की सब्जियां भी लगाई गई हैं. दिलचस्प यह है कि इन पार्कों और बगीचों की हरियाली बनाए रखने के लिए स्वच्छ पानी नहीं, बल्कि वेस्ट वॉटर का इस्तेमाल किया जाता है. ग्रामीण अपने पालतू पशुओं जैसे- भैंस आदि को नहलाने या अन्य कार्यों के लिए जिस पानी का इस्तेमाल करते हैं, अंडरग्राउंड पाइप के माध्यम से स्कूल में उसी वेस्ट वॉटर से सिंचाई की जाती है."
स्कूल में सीजनल सब्जियां उगाई जाती हैः वहीं, स्कूल में लगाए गए फलदार पेड़ काफी मात्रा में फलों से लदे रहते हैं. इन फलों में पपीता, केला (बेबी बनाना), एवोकाडो और बेलपत्र भी हैं. इसके अलावा सीजनल सब्जियां उगाई जाती हैं. इन सभी कार्यों बारे छात्रों को भी जानकारी देने सहित उनके विधि भी सिखाई जाती है. स्कूल में शिक्षा से लेकर अन्य सभी गतिविधियों का संचालन स्कूल प्रिंसिपल समेत शिक्षक रमेश, विलोक वर्मा, पवित्र, नरेश, अंजना और शशांक एक टीम के रूप में करते हैं.
गार्डन में वर्मी कम्पोस्ट का इस्तेमाल: स्कूली शिक्षक सभी पार्कों, गार्डन समेत सब्जियों और पेड़-पौधों के लिए स्कूल में ही वर्मी कम्पोस्ट (खाद) तैयार करते हैं. नतीजतन पूरे स्कूल परिसर मे कहीं ढूंढने से भी कूड़ा-कचरा दिखाई नहीं देता, बल्कि चारों ओर हरियाली और स्वच्छता बनी रहती है. क्योंकि सड़े-गले जैविक कचरे औ गोबर को विघटित करके उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार की जाती है. यहां गौर करने वाली बात यह है कि स्कूल गांव में है तो गोबर का प्रबंध भी ग्रामीणों के पालतू पशुओं से हो जाता है. ग्रामीण वार्मी कम्पोस्ट के लिए स्कूल प्रबंधन को गोबर देकर अपने परिसर को साफ-सुथरा रखते हैं, जबकि स्कूल शिक्षक बगीचों व पेड़-पौधों के तेजी से विकास के लिए पोषक तत्वों वाली खाद तैयार कर उसका इस्तेमाल करते हैं. शिक्षक रमेश ने बताया कि प्रत्येक वर्ष सुखना झील पर लगने वाले पौध मेले में स्कूल द्वारा करीब तीन सौ किलो खाद वितरित की जाती है, ताकि बच्चों में जागरूकता आ सके.
जल संचयन प्रणाली: स्कूल के सभी शिक्षक रोजाना एक टीम के रूप में काम करते हैं. स्कूल में किसी भी चीज को खराब नहीं होने दिया जाता, क्योंकि शिक्षक सभी छात्रों को वेस्ट चीजों का भी सदुपयोग सीखाते हैं. इसी तरह स्कूल में जल दोहन नहीं होने दिया जाता, यहां तक कि जल संचयन प्रणाली से बारिश के पानी को भी स्टोर किया जाता है. दो अलग-अलग जगहों पर बारिश के पानी को स्टोर किया जाता है, आवश्यकतानुसार पानी का इस्तेमाल किया जाता है.
इसके अलावा ड्रिंकिंग वॉटर स्थल भी पूरी तरह स्वच्छ बनाया गया है. एक ओर पेयजल तो दूसरी ओर हाथ धोने के लिए टैप लगाए गए हैं. यहां जानने वाली खास बात यह है कि हैंडवॉश के लिए शिक्षक दीपक द्वारा एक विशेष प्रकार का पानी (सेनेटाइजर) तैयार किया जाता है. रोजाना करीब 7-8 लीटर इस सेनेटाइजर से ही छात्र हाथ धोते हैं, ताकि वह स्वस्थ रह सकें.
दीवारों पर सुंदर आकृतियां: स्कूल प्रांगण की खूबसूरती में शिक्षकों और छात्रों द्वारा दीवारों पर सुंदर आकृतियां उकेरी गई हैं. विभिन्न रंगों से उकेरी इन आकृतियों को इस प्रकार से बनाया है कि लंबे समय तक नई दिखाई दें. इन आकृतियों को पहले सांचे से उकेरा गया और फिर उनमें रंग भरे गए हैं. हरियाली और सुंदर आकृतियों से छात्रों के लिए शिक्षा का सकारात्मक माहौल बनता है. वहीं, स्कूल की गैलरी से कक्षाओं तक स्वच्छता का ध्यान रखा गया है. प्रत्येक कक्ष पर आकर्षक रूप से उसकी पहचान लिखी गई है कि वह कक्ष किस कार्य से संबंधित है.
अटल टिंकरिंग लैब: स्कूली छात्रों को अटल टिंकरिंग लैब में विभिन्न मॉडल के माध्यम से डिवाइस तैयार और उन्हें ऑपरेट करना सिखाया जा रहा है. यहां तैयार किए जाने वाले मॉडल के माध्यम से ट्रैफिक लाइट प्वाइंट की कार्यप्रणाली, संभावित खतरों से बचाव के लिए सेंसरनुमा अलर्ट सिस्टम, स्वयं खुलने-बंद होने वाले डस्टबिन और सौर उर्जा से संचालित डिवाइस तैयार करने सिखाए जा रहे हैं. लैब में छात्रों को ड्रोन बनाना भी सिखाया जा रहा है, जिस पर फिलहाल काम जारी है. आधुनिक और डिजिटलाइजेशन के दौर के लिए सभी बच्चों को अटल टिंकरिंग लैब में रोजाना वैज्ञानिक विधि के इस्तेमाल से रोजाना की जिंदगी में आ रहे बदलाव को भी समझाया जाता है.
चंडीगढ़ प्रशासक ने किया सम्मानित: शिक्षक रमेश ने बताया कि "उन्हें गर्व है कि गांव धनास के इस पीएमश्री जीएमएसएसएस स्कूल को स्वच्छता के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है." उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने स्कूल की उपलब्धियों, विशेषकर डेकोरेशन को सराहा और सितंबर महीने में स्कूल को फर्स्ट रैंक आने पर 51 हजार रुपये का पुरस्कार दिया. बताया कि दिनों शिक्षा मंत्री और कृषि मंत्री द्वारा चंडीगढ़ सेक्टर-18 स्थित टैगोर थिएटर में आयोजित समारोह के दौरान शिक्षकों और छात्रों के साथ सेल्फी ली गई, जिससे वह गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं.
120केवी का सोलर पैनल और मिड-डे मील: 19 जनवरी 1979 से संचालित इस स्कूल की छत पर 120 किलोवाट का सोलर पैनल लगाया गया है, ताकि सौर ऊर्जा से सुरक्षित कल की परिकल्पना को साकार किया जा सके. इसी पीएमश्री जीएमएसएसएस स्कूल की रसोई से गांव धनास के अन्य तीन स्कूलों के करीब छह हजार छात्रों के लिए मिड-डे मील तैयार किया जाता है. वहीं, स्कूल की वॉल ऑफ एक्सीलेंस को भी दर्शनीय बनाया गया है, जहां कई तस्वीरें स्कूल के सभी अनूठे कार्यों को खुद बयां कर रही है.
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