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सरकारी विद्यालय को आदर्श स्कूल बनाने की सजा!, टीचर का ट्रांसफर और शिक्षा विभाग का नोटिस

सरकारी विद्यालय को आदर्श स्कूल बनाने की सजा!, टीचर का ट्रांसफर और शिक्षा विभाग का नोटिस सरकारी स्कूल को आदर्श बनाने वाले शिक्षक का पहले ट्रांसफर फिर शिक्षा विभाग का नोटिस, पूछा किसकी अनुमति से किया अच्छा काम. रिपोर्ट दिव…

10 अक्टूबर 2026 को 03:02 am बजे
सरकारी विद्यालय को आदर्श स्कूल बनाने की सजा!, टीचर का ट्रांसफर और शिक्षा विभाग का नोटिस

सौजन्य से:- ETV Bharat

सरकारी विद्यालय को आदर्श स्कूल बनाने की सजा!, टीचर का ट्रांसफर और शिक्षा विभाग का नोटिस

सरकारी स्कूल को आदर्श बनाने वाले शिक्षक का पहले ट्रांसफर फिर शिक्षा विभाग का नोटिस, पूछा किसकी अनुमति से किया अच्छा काम. रिपोर्ट दिव्यराज सिंह.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : October 7, 2026 at 9:46 PM IST

रतलाम: एक तरफ जहां शासकीय स्कूलों की खस्ता हालत और गिरते शिक्षा के स्तर की खबरें लगातार सामने आती हैं. वहीं, कुछ शासकीय स्कूल ऐसे भी हैं जो प्राइवेट स्कूल से भी बेहतर और आदर्श स्कूल हैं. एक आदर्श शासकीय स्कूल के रूप में पूरे प्रदेश में फेमस हुआ जावरा ब्लॉक का रूपनगर स्थित प्राथमिक स्कूल अब फिर चर्चाओं में है. लेकिन इस बार स्कूल को आदर्श बनाने वाले शिक्षक बद्री लाल राठौड़ को शिक्षा विभाग द्वारा थमाए गए कारण बताओं नोटिस की वजह से यह चर्चाओं में है.

सरकारी स्कूल को आदर्श स्कूल बनाने वाले शिक्षक को नोटिस

जिला शिक्षा अधिकारी ने शिक्षक को नोटिस जारी कर स्कूल परिसर में करवाए गए निर्माण कार्य, रंग रोगन, फर्नीचर, वाटर कूलर और अन्य कार्य के संबंध में सवाल पूछा है कि किस मद और स्वीकृति से स्कूल में यह कार्य किए गए हैं. इसके साथ ही स्कूल में निशुल्क सेवा देने वाले एक शिक्षक और दो अन्य शिक्षिकाओं को बच्चों को पढ़ाने की अनुमति दिए जाने पर भी नोटिस में कारण पूछा गया है.

गांव के सभी बच्चे प्राइवेट स्कूल नहीं जाते

दरअसल, जावरा क्षेत्र के रूपनगर गांव स्थित यह प्राथमिक स्कूल मीडिया में छपी खबरों के बाद चर्चाओं में आया था. यहां के शिक्षक बद्रीलाल राठौड़ और शिक्षक पालक संघ द्वारा जन भागीदारी से शासकीय स्कूल को इस तरह विकसित किया गया था कि गांव के सभी बच्चे प्राइवेट स्कूल नहीं जाते हुए इसी सरकारी स्कूल में पढ़ने आते थे. स्कूल में प्राकृतिक सौंदर्य और स्वच्छता के साथ अच्छा फर्नीचर, वाटर फिल्टर और कुलर आदि की व्यवस्था जन भागीदारी और शिक्षक द्वारा अपनी तनख्वाह में से निजी खर्च कर की गई थी. लेकिन 2 महीने पूर्व शिक्षक बद्री लाल राठौड़ का स्थानांतरण सेमलिया स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय में कर दिया गया था. अपने पसंदीदा शिक्षक का ट्रांसफर रुकवाने के लिए बच्चों के साथ ग्रामीणों ने भी कलेक्ट्रेट पहुंचकर विरोध किया था. लेकिन ट्रांसफर नहीं रुकवाया जा सका. धीरे-धीरे स्कूल में बच्चों की संख्या भी कम हो गई.

रिटायर्ड नारकोटिक्स इंस्पेक्टर को स्कूल में पढ़ाने से रोका

स्कूल को निशुल्क पढ़ाने की सेवाएं दे रहे रिटायर्ड नारकोटिक्स इंस्पेक्टर जगदीश यादव को भी शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बच्चों को पढ़ाने से रोक दिया. इसके बाद अब स्कूल में केवल दो ही शिक्षक पदस्थ हैं. इसी दौरान शिक्षा विभाग के द्वारा शिक्षक बद्री लाल राठौड़ को कारण बताओं नोटिस जारी किया गया जिसमें उनसे पूछा गया है कि स्कूल में शिक्षा विभाग के द्वारा पदस्थ किए गए शिक्षकों के अलावा अन्य शिक्षकों को किसी अनुमति से शासकीय स्कूल में पढ़ाने की अनुमति दी गई. वहीं, स्कूल की बाउंड्री वॉल निर्माण, कलर, चित्रकारी, फर्नीचर और अन्य सामग्री की व्यवस्था किस मद और प्रशासनिक आदेश से की गई है.

शिक्षक बद्री लाल राठौड़ ने बताया कि उन्हें जो नोटिस मिला था उसका जवाब उनके द्वारा निर्धारित समय अवधि में दे दिया गया है. वर्तमान में वह सेमलिया स्थित प्राथमिक विद्यालय में पदस्थ हैं. रूपनगर स्थित स्कूल में जो भी कार्य और नवाचार किए गए थे वह सभी स्थानीय ग्रामीण और शिक्षक पालक संघ के माध्यम से किए गए थे. शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अंतर्गत शिक्षक पालक संघ को पर्याप्त अधिकार दिए गए हैं. जिसमें शिक्षक पालक शाला में नवाचार करने, स्कूल के विकास की योजना बनाने जन भागीदारी से फर्नीचर खेल एवं पाठ्य सामग्री उपलब्ध करवाने जैसे कार्य कर सकते हैं.

रिवॉर्ड देने की बजाय मिला नोटिस

एक शासकीय स्कूल को आदर्श स्कूल बनाने में योगदान देने वाले शिक्षक का पहले तो स्थानांतरण कर दिया गया जिसके बाद उन्हें स्कूल के लिए किए गए अच्छे कार्यों के लिए कारण बताओं नोटिस जारी कर दिया गया. रूपनगर स्थित स्कूल में निशुल्क सेवा देने वाले रिटायर्ड नारकोटिक्स इंस्पेक्टर जगदीश यादव ने बताया कि "जिस कार्य के लिए एक शिक्षक का सम्मान होना चाहिए इसकी बजाय उन्हें कारण बताओं नोटिस जारी कर हतोत्साहित किया जा रहा है."

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वहीं, अब इस मामले पर शिक्षा विभाग बैकफुट पर आ गया है. जिला शिक्षा अधिकारी सिमरन सूर्यवंशी से जब ईटीवी भारत ने फोन पर सवाल किया तो उन्होंने बताया कि "शिक्षक को स्कूल का रिनोवेशन कार्य करवाने के लिए कारण बताओं नोटिस जारी नहीं किया गया है. इस बारे में कार्यालय से जानकारी लेकर वास्तविक स्थिति बताने की बात जिला शिक्षा अधिकारी ने फोन पर कही." लेकिन उसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी सिमरन सूर्यवंशी द्वारा दोबारा फोन नहीं उठाया गया.

इस पूरे घटनाक्रम में शिक्षा विभाग और जिला शिक्षा अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं. क्योंकि आदर्श स्कूल बन चुके रूपनगर के प्राथमिक विद्यालय की व्यवस्था तीन महीनों ही बिगड़ने लगी है और अब यह स्कूल सामान्य शासकीय स्कूलों की तरह हो गया है. जहां अब बच्चों की संख्या में भी गिरावट आ गई है.

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